पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ज़मानत दे दी है। दिशा को ये ज़मानत एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर मिली है। दिल्ली पुलिस ने दिशा को किसान आंदोलन से जुड़े ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले में 14 फरवरी को बेंगलुरू से गिरफ्तार किया था।

बीते कल ही दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि की रिमांड को बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि हम तीनों आरोपियों दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु मुलुक को एक साथ बैठाकर पूछताछ करना चाहते हैं।

इस दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने दिशा रवि की रिमांड एक दिन बढ़ा दी थी।

इससे पहले शनिवार को कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था। जिसके बाद आज कोर्ट ने दिशा को ज़मानत दे दी। दिशा को मिली इस ज़मानत के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है।

पर्यावरण को लेकर काम करने वाली भारतीय महिला एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम ने एक ट्वीट कर इसे सच्चाई की जीत बताया है।

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट’ की जांच के मामले में दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरू की कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ्तार किया था। जबकि जैकब और मुलुक को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी थी।

पुलिस ने टूलकिट को लेकर आरोप लगाया था कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के नाम पर भारत में हिंसा और अशांति फैलाने की साजिश के तहत इसे तैयार किया गया।

दिशा रवि पर पुलिस ने टूलकिट को एडिट करने का आरोप लगाया था। पुलिस का कहना था कि दिशा उस मीटिंग में भी शामिल थीं जिसमें देशविरोधी बातें की गईं थीं।

इसपर दिशा के वकील ने कहा था कि किसी देश विरोधी व्यक्ति से बातचीत करना क्या देशद्रोह है? किसानों की बात करना क्या अपराध है? दिल्ली पुलिस गलत आरोप लगा रही है। क्या हिंसा करने वाले किसी भी व्यक्ति ने कहा कि उसने टूलकिट पढ़कर हिंसा की?

उन्होंने कहा कि हम किसी आंदोलन को पसंद-नापंसद कर सकते हैं। पसंद या नापसंद करने से हम देशद्रोही नहीं हो जाते।

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