चौबीस घंटे पहले कानपुर के आनंदपुरी में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर डीजीजीआई और इनकम टैक्स छापा मारा। ताजा अपडेट ये है कि 6 बड़े-बड़े बक्सों के भर जाने के बाद भी नोटों की गिनती जारी है। चार-चार मशीनें लगातार नोट गिनने का काम कर रही हैं। फिलहाल रकम 150 करोड़ रुपए बतायी जा रही है।

पीयूष जैन कन्नौज की इत्र वाली गली में कारोबार करने के लिए चर्चित हैं। कन्नौज के अलावा कानपुर और मुंबई में भी पीयूष जैन का ऑफिस है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनकम टैक्स को कथित तौर पर इनकी 40 से ज्यादा ऐसी कंपनियां मिली हैं, जिनके माध्यम से कारोबार चलाया जा रहा था।

इस घटना का एक पॉलिटिक एंग्ल भी सामने आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी और तमाम न्यूज़ चैनलों के दावों के मुताबिक, इत्र के इस व्यापारी से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संबंध हैं। साथ ही ये दावा किया गया है कि इस व्यापारी ने ‘समाजवादी इत्र’ बनाई थी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस छापेमारी की सूचना सार्वजनिक होने के बाद भाजपा द्वारा समाजवादी पार्टी को लगाता निशाना बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया गया, ”यह है सपाइयों का असली रंग, समाजवादी इत्र से ‘भ्रष्टाचार की गंध’ छिप नहीं पाई अखिलेश यादव, करोड़ों-करोड़ों का काला धन आपके झूठे समाजवाद की पोल खोल रहा है। सपा मतलब भ्रष्टाचार, ये नई नहीं, वही सपा है।”

हालांकि सवाल तो भारतीय जनता पार्टी से भी बनता है। कालाधन पर रोक और कैशलेस इकॉनोमी के नाम पर किए गए नोटबंदी को पांच वर्ष बीतने के बाद भी कोई व्यक्ति इतना अधिक कैश कैसे इक्ट्ठा कर पाया?

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