वैसे तो टीवी चैनलों पर हर रोज कोई न कोई हंगामा किया जाता है मगर ताज़ा विवाद थोड़ा अलग और दिलचस्प है। ‘आज तक’ के लखनऊ कॉन्क्लेव में चर्चा के दौरान यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे ‘ईमानदार’ बता दिया, जिसपर वहां मौजूद एंकर अंजना ओम कश्यप ने न सिर्फ आपत्ति जताई बल्कि भड़कते हुई वो बहस करने पर उतारू हो गईं। पूरे प्रकरण के तमाम राजनीतिक पहलुओं पर गौर करने के लिए हमारी ये संपादकीय टिप्पणी पढ़िए-

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज तक चैनल को ईमानदार कह दिया। जी हाँ, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज तक चैनल को ईमानदार कह दिया। चैनल की गरिमा के खिलाफ बार-बार बयान देते हुए उन्होंने इसे फिर से ‘प्रतिष्ठित और इमानदार’ कह दिया।

ये सब अंजना से नहीं सुना गया, वो गुस्सा हो गईं और पलट कर पूछ लिया-आपने हमको ईमानदार कैसे कह दिया?गुस्से में अंजना ओम कश्यप ने अखिलेश यादव को खूब खरी-खोटी सुनाई और अखिलेश यादव को बैकफुट पर जाना पड़ाउन्होंने कहा आज से मैं आपको इमानदार नहीं कहूंगा।

ये सब बातें तो वो हैं जो लखनऊ स्थित ताज होटल के ‘आज तक कॉन्क्लेव’ में घटित हुईं, ये बातें तो वो हैं जो तमाम कैमरों के सामने हुईं, देशभर के लोगों ने इसे देखा भी।

मगर असल बात और असल सवाल ये है कि ईमानदार कहने पर अंजना ओम कश्यप भड़क क्यों गईं? शायद उन्हें शक था कि अखिलेश यादव उनपर तंज कस रहे हैं इसलिए अंजना भड़क गईं मगर वैसे भी ईमानदार शब्द सुनकर उन्हें भड़क जाना चाहिए।

आखिर ऐसे कैसे कोई आकर उस चैनल को ईमानदार बोल कर चला जाएगा जिसने बेईमानी की सारी हदें पार कर दी है। आखिर ऐसे कैसे कोई आकर उस चैनल को प्रतिष्ठित बोल देगा जिसने प्रतिष्ठा तो छोड़ो शर्म और लाज भी ताक पर रख दी है।

आखिर ऐसे कैसे कोई आकर उस चैनल के एंकरों को सच्चा बोल देगा जिन्होंने पूरी मेहनत से, पूरी शिद्दत से, झूठ बोलने का काम किया हो। बिल्कुल ये सवाल अखिलेश यादव से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने इस चैनल को ईमानदार क्यों कहा?

कोबरापोस्ट के स्टिंग में कैमरे के सामने एक्सपोज हो चुका है जो चैनल, उसको इन्होंने ईमानदार क्यों कहा? इन्हीं की सरकार के खिलाफ 56 एसडीएम के यादव होने के झूठ को फैला चुका है जो चैनल, उसको इन्होंने सच्चा क्यों कहा?

तमाम झूठ और बेशर्मी के साथ रोज प्रोग्राम करता है जो चैनल, उसको इन्होंने प्रतिष्ठित क्यों कहा? हो सकता है अपने बोलने के अंदाज़ में इन्होंने तंज ही किया हो। मगर फिर भी सवाल बना हुआ है कि उन्हें सिर्फ तंज़ ही क्यों किया?

झूठ और दुष्प्रचार के आरोप में इस चैनल पर अभी तक कोई केस क्यों नहीं किया है? नफरत और दंगाई भाषा के लिए इस चैनल का सामूहिक बहिष्कार क्यों नहीं किया है? किसानों के खिलाफ प्रोपगेंडा चलाने के बाद भी ऐसे चैनल पर चर्चा का निमंत्रण स्वीकार क्यों किया है?

ये सवाल सिर्फ अखिलेश यादव से नहीं है। विपक्ष के तमाम छोटे-बड़े नेताओं से है। गांव गली बूथ तक काम कर रहे हो उनके कार्यकर्ताओं से है। सिविल सोसाइटी और सामाजिक कार्यकर्ताओं से है। करोड़ों की संख्या में मौजूद आम जनता से है, मतदाताओं से है कि आप इन टीवी चैनलों को ईमानदार और प्रतिष्ठित कहने का कोई भ्रम ही क्यों पाल रहे हैं?

कोई तंज भी कर रहे हैं तब भी तो इन पर अपना समय बर्बाद कर रहे हैं! क्यों नहीं जनता की आवाज उठाने वाले तमाम वैकल्पिक मीडिया को ‘जन सहयोग’ से ‘जन मीडिया’ बना रहे हैं। पूंजीवादियों और जातिवादियों ने जो बनाई है मीडिया की मंडी, वहां खड़े होकर आप क्यों ठगे जा रहे हैं?

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