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केंद्र से N-95 मास्क चाहिए 10 लाख और वेंटिलेटर सिर्फ 100, क्या बिहार की कोरोना पर ये तैयारी है?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि राज्य ने 100 वेंटिलेटर की मांग की थी मगर अभी तक नहीं मिला है।

12 करोड़ की आबादी वाले राज्य में अगर तालाबंदी हुई है तो उसका कोई आधार होगा। कुछ अनुमान होगा कि बीमारी इतनी फैल सकती है तो डाक्टर और अस्पताल की व्यवस्था होनी चाहिए। या फिर तालाबंदी ही एकमात्र तैयारी है बिहार की? मुख्यमंत्री की प्रेस रिलीज़ से तो ऐसा ही लगता है।

तालाबंदी एक तरह से समय और मौका देती है कि आप संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर मेडिकल इंतज़ाम तेज़ी से कर लें। क्या बिहार को सिर्फ 100 वेंटिलेटर की ज़रूरत होगी?

तब फिर बिहार ने केंद्र से 5 लाख PPE और 10 लाख N-95 मास्क की मांग क्यों की है? PPE ही पहन कर तो कोरोना के चिकित्सक या हेल्थवर्कर आई सी यू में जाएंगे।

मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि बिहार ने कोरोना के मरीज़ों के लिए कितने आई सी यू बेड बनाए हैं?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि हम लोगों ने 5 लाख PPE किट की मांग की है। अभी तक 4000 ही मिला है। सोचिए एक तो बिहार में डाक्टरों और हेल्थ वर्कर की संख्या बेहद कम है। ऊपर से उनकी सुरक्षा के लिए PPE के इंतज़ाम का क्या ये हाल है कि दो महीने बीत जाने के बाद 4000 PPE केंद्र से मिले हैं।

30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला केस आया था। 2 अप्रैल तक केंद्र बिहार को 4000 PPE किट दे सका है।

यही नहीं बिहार ने दस लाख N-95 मास्क की मांग की है। अभी तक 50,000 ही मिला है।

बिहार में 12000 से अधिक लोग विदेश से आए हैं। उन्हें क्वारेंटिन में रखा गया है। ज्यादातर को होम क्वारेंटिन में रखा गया है और यहां तक कि गांवों में रखा गया है। ज़ाहिर है गांवों में न टेस्ट की व्यवस्था है और न तबीयत बिगड़ने पर कोरोना के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल की सुविधा है। खुद स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने मार्च 2018 में विधान सभा में कहा था कि बिहार के 18 ज़िलों के अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यानि उस वक्त नहीं होंगे। इस वक्त कितने हैं पता नहीं।

आपको पता होगा कि कोरोना के मरीज़ की देखते देखते हालत बिगड़ जाती है। न्यूयार्क के डाक्टर इम्तियाज़ पटेल ने कहा कि तीन से चार घंटे में हालत खराब हो जाती है। उसे वेंटिलेटर पर रखना होता है। अगर आप दुनिया की खबर रखते हैं तो पता चल सकता है कि गांवों में होम क्वारेंटिन करना कितना ख़तरनाक है। वहां से पटना ले जाते जाते ही काफी देर हो चुकी होगी। मैं अभी गांवों से सैंपल लेकर टेस्ट करने की बात नहीं कर रहा।

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद क्या आपने इन प्रश्नों पर प्रमुखता से रिपोर्टिंग देखी है कि 12 करोड़ की आबादी वाले राज्य को केंद्र ने 4000 PPE दिए हैं। 100 वेंटिलेटर भी नहीं दिए हैं।

बिहार के लोग मस्त होंगे लेकिन उन्हें डाक्टरों के लिए तो चिन्तित होना चाहिए। बगैर PPE N-95 मास्क के वे कोरोना के मरीज़ों का कैसे इलाज करेंगे?

इन नाकामियों पर दो ही चीज़ से पर्दा डाला जा सकता है। एक नौटंकी से और दूसरा हिन्दू मुस्लिम डिबेट से।

दोनों का इंतज़ाम हो चुका है। वेंटिलेटर का इंतज़ाम होता रहेगा। चंद्रमा के चक्र के अनुसार।

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