प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय बंदरगाहों के विकास की बात को राजनीति के केंद्र में रखते हैं। बनारस में भी एक बंदरगाह बना है। यह और बात है कि उससे कितना कारोबार हो रहा है, इसकी बात नहीं होती है। जब बन रहा था तब इसे विकास के एक नए शिखर के रुप में पेश किया जा रहा था।

सरकार दावा करती है कि पुराने बंदरगाहों के विकास और नए बंदरगाहों के निर्माण को लेकर 6 लाख करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट सागरमाला प्रोजेक्ट के तहत चल रहे हैं। इनमें से कई प्रोजेक्ट का टारगेट 2035 है। चेक करते रहिएगा कब पूरा होंगे।

लेकिन अगर इसी सेक्टर से भारत के बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा बैंक फ्राड पकड़ा जाए और वह भी गुजरात से तब इसकी तह पर जाने का प्रयास करना ही चाहिए। लेकिन मीडिया इस खबर की पड़ताल बंद कर देगा जैसे अदाणी पोर्ट से 20,000 करोड़ के ड्रग्स पकड़े जाने के मामले में किया।

उसे छोड़ कर कुछ ग्राम के मामले में आर्यन खान की खबर में सारे रिपोर्टर लगा दिए गए थे ताकि जनता का ध्यान 20,000 करोड़ के ड्रग्स पकड़े जाने की खबर से हट जाए। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते 20,000 करोड़ का ड्रग्स भारत आ रहा है।

सूरत की एक शिपयार्ड कंपनी है एबीजी। इस कंपनी ने 23 बैंकों को चपत लगाकर 22, 847 करोड़ का घोटाला कर लिया है। यह बैंक फ्राड है। कंपनी ने अपने बहीखाते में फर्ज़ी आंकड़े डाल कर बैंक से लोन लिए।

23 बैंकों को कोई कंपनी चपत लगा रही है और किसी को उसी वक्त शक नहीं हुआ, यह बता रहा है कि बैंक बड़ी कंपनियों को लोन देने के मामले में कैसे आंखें मूंद लेते हैं।

आम आदमी घर का लोन लेता है तो उसकी कितनी चेकिंग होती है। लेकिन कोई कंपनी 23 बैंकों से 23000 करोड़ का लोन लेती है और पैसा लेकर भाग जाती है यह पता चलने में महीनों लग जाते हैं। दो साल लग जाते हैं जांच करने और FIR करने में। 23 बैंकों ने गुट बनाकर नवंबर 2019 में सीबीआई को पहली शिकायत की थी।

आज SBI ने जो जवाब जारी किया है, वह और भी संदेह गहरा करता है। SBI ने लिखा है कि सबसे अधिक पैसा ICICI का है और फिर IDBI का है लेकिन शिकायत SBI ने की। क्या यह सूचना इसलिए दी गई ताकि यह साफ हो कि केवल SBI का पैसा नहीं डूबा है बल्कि ICICI और IDBI का भी पैसा लेकर भागा है।

SBI ने जिस चालाकी से यह रिलीज़ तैयार की है उसे बताना चाहिए कि ICICI, IDBI और उसका कितना पैसा यह कंपनी लेकर भागी है।

अगर वह यह बता रही है कि सबसे ज्यादा फलां बैंक का है तो यह भी बता दे कि फलां बैंक का कितना है। कहीं तीनों में कुछ सौ करोड़ का अंतर तो नहीं है। इसलिए रैंकिंग से संदेह और गहरा हो जाता है।

SBI की प्रेस रिलीज़ से लगता है कि 2013 से ही 23 बैंकों को पता चल गया था कि कंपनी डूब रही है ।अच्छा कारोबार नहीं कर रही है तो लोन का फिर से पुनर्गठन किया गया और कंपनी को चलाने का प्रयास किया गया लेकिन जहाजरानी सेक्टर में मंदी के कारण कंपनी का कोराबार उभर नहीं सका।

कमाल का जवाब है। यह जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जहाजरानी सेक्टर में किए जा रहे प्रयासों की भी पोल खोलता है। बंदरगाहों पर विशेष ध्यान देने के नाम पर सरकार छवि बनाती है कि वह देश के लिए नया सोच रही है।

बनारस में बंदरगाह बन रहा है तो यहां वहां बन रहा है। सरकार ने कितनी छवि बनाई कि वह इस सेक्टर में संभावनाओं का विस्तार कर रही है और इसी सेक्टर की एक कंपनी भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंक घोटाला करती है। वाह मोदी जी वाह। SBI ने अपनी सफाई से मोदी के दावों को साफ कर दिया है।

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि कांग्रेस ने 2018 में भी एबीजी शिपयार्ड के स्कैम को लेकर सरकार को चेताया था। अगर ऐसा है तब तो यह बेहद संगीन मामला है।

बैंकों ने CBI को पहली सूचना नवंबर 2019 में दी है। कांग्रेस ने पूछा है कि सरकार ने कार्रवाई करने में पांच साल का वक्त क्यों लिया। 2007 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब एबीजी शिपयार्ड को 1, 21, 000 वर्ग मीटर की ज़मीन दी गई थी।

मैं तो एबीजी ग्रुप के ऋषि अग्रवाल की कल्पना कर रहा हूं। 23 बैंकों से 23000 करोड़ रुपये चपचपत कर विदेश भेज देने वाले अग्रवाल ने कितनी ऐश की ज़िंदगी जी होगी। थोड़ा खाया होगा, थोड़ा खिलाया होगा। उनके दरबार में हाज़िरी लगाकर कितने दलों के नेताओं ने मौज की या किसी एक ने ही की।

कहीं इस पैसे से अग्रवाल ने बीजेपी के लिए बान्ड तो नहीं खरीदा, अगर यह जानना हो तो कैसे जाना सकता है? आज सफाई आई है कि कोई विदेश नहीं भागा है तब फिर क्या ऋषि अग्रवाल औऱ इस मामले में अन्य आरोपियों को हाज़िर किया जाएगा?

नीरव मोदी का आज तक पता नहीं चला। 14000 करोड़ का लोन लेकर भाग गया। बैंकों ने इस फ्राड को कैसे सहा होगा। मेहुल चौकसी का भी पता नहीं चला। वडोदरा का चेतन और नितिन संदेसरा अपने परिवार के साथ भारत से भाग गया।

फर्ज़ी बहीखाता दिखाकर बैंकों से लोन लिया औऱ 16000 करोड़ की राशि भारत से बाहर खपा दी। ED ने 14000 करोड़ से अधिक की संपत्ति ज़ब्त की है।

मीडिया की ख़बरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान इन बंधुओं ने 900 करोड़ की पेशकश की थी ताकि हिसाब किताब बराबर हो सकें। संदेसरा के केस में कई लोग जेल में हैं।

द हिन्दू के देवेश पांडे की एक रिपोर्ट है। 2020 में सीबीआई ने बैंक फ्राड के 190 मामले दर्ज किए थे। इन 900 मामलों में 60,000 करोड़ के घोटाले हुए हैं। दर्जन भर से अधिक ऐसे घोटाले हैं जिनमें 1000 करोड़ से अधिक का फ्राड हुआ है। ये घोटाले अलग अलग राज्यों में दर्ज किए गए हैं।

इनमें से एक घोटाला 7,926 करोड़ का है। हैदराबाद की एक कंपनी ने यह पैसा बाहर भेज दिया है। हैदाराब की ही एक और कंपनी है VRCL Limited जिसने ₹4,837 करोड़ का घोटाला किया है।

2021 में बैंक फ्राड के मामले में 2020 की तुलना में कमी आई है लेकिन यह कमी इतनी ही है कि इस साल के दौरान 30,000 करोड़ के फ्राड हुए हैं। यह कोई छोटी राशि तो नहीं है। 2020-21 में हर दिन भारत में 229 बैंक फ्राड के मामले सामने आए हैं। RBI के आंकड़े के हिसाब से इसका एक प्रतिशत से भी कम वापस हासिल किया जा सका है। यानी जो पैसा लेकर भागा वो भागा ही रह गया।

28 दिसंबर 2021 की बिजनेस स्टैंडर्ड की एक ख़बर है। RBI की रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 के दौरान भारत में बैंक फ्राड के 4,071 मामले सामने आए। उसके पहले 3, 499 मामले ही आए थे। अप्रैल से सितंबर 2021 के बीच 36,342 करोड़ का फ्राड हुआ है। जबकि इसी समय 2020-21 के दौरान 64, 261 करोड़ का बैंक फ्राड हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उनके राज्य गुजरात से करीब 53,000 करोड़ के बैंक घोटाले की ख़बर आ चुकी है। हज़ारों करोड़ के बैंक फ्राड भारत के दूसरे राज्यों से भी हुए हैं लेकिन जिस तरह से गुजरात में घोटाले हुए हैं उससे शक होना चाहिए कि इसका संबंध राजनीति से तो नहीं है।

आखिर हज़ारों करोड़ का घोटाला करने वाला राजनीतिक ताल्लुकात नहीं रखता होगा, उन्हें पैसे नहीं देता होगा, यकीन करना मुश्किल है। छह करोड़ गुजरातियों की अस्मिता की राजनीति करने वाले नरेंद्र मोदी को अपने राज्य की तो चिन्ता करनी ही चाहिए।

गुजरात के इन वीरों का सम्मान भी वीरों की इस धरती पर होना चाहिए। वहां लगता है कि हिन्दी प्रदेशों के फिरोती उद्योग की तरह फ्राड उद्योग चल रहा है जिसमें बैंकों का हज़ारों करोड़ रुपया साफ किया जा रहा है।

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