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कोरोना : ‘पेनडेमिक या प्लानडेमिक?

कोरोना के बारे में यह सवाल पूरे विश्व मे उठना शुरू हो गए हैं पिछली पोस्ट में आपको अमेरिकी कम्पनी मोडर्ना ओर CEPI के सहयोग से बनने वाली पहली ह्यूमन ट्रायल में सफल वैक्सीन की जानकारी दी थी.

CEPI एक संगठन है जो 2017 में मुख्यतः बिल गेट्स ने अपनी महामारियों में रुचि के कारण बनाया था इसका फुलफोर्म है ‘कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस’ इनोवेशन ……23 जनवरी 2020 के दिन वुहान में दुनिया का पहला लॉक डाउन किया गया उसी दिन इसकी वेबसाइट पर एक लेख पब्लिश होता है.

CEPI जो महामारी संबंधी तैयारी नवाचार के लिए गठबंधन है उसने आज नोवेल कोरोनावायरस, nCoV-2019 के खिलाफ टीके विकसित करने के लिए तीन कार्यक्रमों की शुरुआत की घोषणा की है. पहली है इनोवियो (अमेरिका) दूसरी है द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया ओर तीसरी जिसकी घोषणा 23 जनवरी को गयी मोडर्ना ओर अमेरिका के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज’ के साथ

अब खास बात यह है कि CEPI ने एक विशेष कार्यक्रम विकसित किया है जिसमे वह प्लेटफार्म टेक्नोलॉजी का नाम देता है इस प्लेटफार्म टेक्नोलॉजी के बारे में जो जानकारी उनकी वेबसाइट पर दी गई है मैं आपको शब्दशः वही बता रहा हूँ इंग्लिश में है लेकिन समझने का प्रयास कीजिए

‘The WHO has prioritised a number of diseases that pose a significant public health risk because of their epidemic potential and because there are no or insufficient biomedical countermeasures available against these diseases. “Disease X” is also on this list of priority diseases. “Disease X” represents the knowledge that a serious international epidemic could be caused by a pathogen currently unknown to cause human disease.

The threat posed by Disease X is substantial—according to the Global Preparedness Monitoring Board report, published last month, there is a very real threat of a rapidly moving, highly lethal pandemic of a respiratory pathogen killing 50 to 80 million people and wiping out nearly 5% of the world’s economy. The number of new emerging infectious diseases is on the rise. Disease X could arise through multiple routes: through viral or bacterial mutation; from zoonotic pathogens that jump from animals to human; or through artificial means. In recognition of this global risk, the WHO added Disease X to its Research and Development (R&D) Blueprint list of priority diseases in 2018.’

बिल्कुल साफ साफ लिखा है डिसीज x के बारे में ! क्या कोविड 19 ही वह बीमारी है…..साफ है कि वह यही बीमारी है. उपरोक्त कथन एक शब्द और है जिसे समझना आवश्यक है वह है ‘pathogen’ विकिपीडिया कहता है ‘रोगजनक (pathogen) उन्हें कहा जाता है, जिनके कारण कई तरह के बीमारियों का जन्म होता है। इसमें विषाणु, जीवाणु, कवक, परजीवी आदि आते हैं। यह किसी भी जीव, पेड़-पौधे या अन्य सूक्ष्म जीवों को बीमार कर सकते हैं। मानव में जीवों के कारण होने वाले रोग को भी रोगजनक रोगों के रूप में जाना जाता है।’

अमेरिका एक विशिष्ट अध्ययन प्रोग्राम चलाता है जिसे Gain-of-function (GOF) कहा जाता है यानी वो अध्ययन, या शोध जो Pathogen की रोग पैदा करने की क्षमता में सुधार करता है, कल एक मित्र ने अपनी पोस्ट में इस बारे में बताया तो मुझे भी इस बारे में रुचि हुई ढूंढने पर यूएस के ऑफशियल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की पेज पर यह जानकारी मिली’ Gain-of-function (GOF) studies, or research that improves the ability of a pathogen to cause disease, help define the fundamental nature of human-pathogen interactions, thereby enabling assessment of the pandemic potential of emerging infectious agents, informing public health and preparedness efforts, and furthering medical countermeasure development’

शायद अब आप कुछ समझ पाए ……फार्मा कम्पनियों के बारे में विदेशों में यह कोई ढका छुपा तथ्य नही है कि ये कंपनियां स्वयं ही म्यूटेशन के जरिये म्यूटेंट वायरस व पैथोजन बनाती हैं और उनके एंटीडोट भी। इसके बाद पैथोजन को रिलीज कर दिया जाता है और महामारी के बाद एंटीडोट रिलीज कर अरबों खरबों का मुनाफा कमाया जाता है। लेकिन भारत मे तो बड़ी फार्मा कंपनियों को ओर बिल गेट्स जैसे तथाकथित परोपकारी को भगवान बना देने की परंपरा है.

यहाँ के बड़े बड़े खोजी पत्रकारों को इसमे तो षणयंत्र दिखता है कि अनिल अंबानी फ्रांस में राफेल सौदे से पहले मोदी जी के साथ दिखता है लेकिन कोरोना के टीके में, कोरोना की दवाई में बिल गेट्स की साफ दिख रही सलिप्तता से वो आँखे मूंद लेते हैं.

( ये लेख गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से लिया गया है लेख में प्रस्तुत किए गए तथ्यों और दावों की पुष्टि बोलता हिंदुस्तान नहीं करता है। )

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