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कोरोना के साथ जीने की आदत डालने की बात कहकर सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त होना चाहती है । औऱ हम लोग भी सरकार के इस नारे के झांसे में आकर मान लिए है कि आज ना कल कोरोना संक्रमित होना ही है ।

लेकिन हालात जिस कदर बिगड़ रही है एक पूरी पीढी हम सब को छोड़ कर चले जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।
कोरोना को लेकर कहां थे और अब कहां पहुंच गये और यही स्थिति रही तो भारत चंद माह के अंदर पहले नम्बर पर पहुंच जाये तो कोई बड़ी बात नहीं है। मौत का आकड़ा भी उसी तरीके से बढ रहा वो भी तब जब हम टेस्ट नहीं करवा रहे हैं मौत को लेकर क्या खेल चल रहा है सबको पता है ।

1. बिहार विधान परिषद के सभापति का रिपोर्ट निगेटिव आया था –

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह की तबियत एक सप्ताह से नसाज चल रही थी उन्होनें जांच भी करवाई थी लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आया था।

उसके बाद विधान परिषद में तोड़ जोड़ और चुनाव को लेकर ये फिर आँफिस जाने लगे थे लेकिन तबियत में कोई सुधार नहीं होता देख ये फिर से जांच कराये तो पूरा परिवार ही कोरोना पाँजिटिव पाये गये। ये हैं हमारे बिहार कि जांच व्यवस्था इसी व्यवस्था के सहारे कोरोना से लड़ रहे हैं ।

2. अस्पताल से बेहतर घर पर ही मर जाना ही कबूल है-
एम्स पटना को छोड़ दे तो बिहार के किसी भी अस्पताल में समान्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं है रोजाना किसी ना कोरोना पीड़ित मरीज़ो का फोन आता रहता है अभी थोड़ी देर पहले दरभंगा मेडिकल कांलेज में भर्ती एक कोरोना पीड़ित मरीज का फोन आया था सर जी बाथरुम का ये हाल है कि बिमारी से क्या संक्रमण से ही मर जायेंगे प्लीज मुझे घर जाने कि अनुमति मिल जाये इसके लिए अस्पताल के प्रबंधक को फोन कर दीजिए ।

कल रात पटना के फोर्ट अस्पताल में एक मरीज का इलाज चल रहा था अचानक रात 9 बजे करीब अस्पताल प्रबंधक उन्हें यह कहते हुए डिसचार्ज कर दिया कि ये अब ठीक है इन्हे घर ले जाये मरीज का परिजन परेशान हो गया क्यों कि बिना ऑक्सीजन के वो पांच मिनट भी नही रह पा रहे थे उसका कोई रिश्तेदार बैक में है उनका फोन आया देखिए प्लीज बचा लीजिए मेरे चाचा जी के साथ ये स्थिति है मैं हैरान था यहां तो अस्पताल वाला छोड़ता नहीं है जब तक आपका पैसा ना खत्म कर दे और ये छोड़ रहा है फोन किये तो पता चला कोरोना का पूरा लक्षण आ गया है और अगर इनको रखे तो अस्पताल में जो दूसरे मरीज पर प्रभाव पड़ सकता है ।

बैक वाले को सलाह दिये एम्स ले जाइए कोई दिक्कत होगा तो कांल करिएगा पता नहीं क्या हुआ फिर उनका फोन नहीं आया है ।

अब बात बिहार के एक मात्र कोरोना स्पेशलिस्ट अस्पताल कि भी कर ही लेते है 3 जुलाई को किडनी का आपरेशन करना के लिए एक बच्चा आईजीएमएस में भर्ती हुआ था। आपरेशन से पहले कोरोना टेस्ट होता है जिसमें उसका रिपोर्ट पाँजिटिव आ गया बस फिर क्या था उस बच्चा को उठाया और एनएमसीएच में जा कर छोड़ दिया और मां उस बच्चे को लेकर इधर से उधर भटक रही है। बड़ी मुश्किल है जगह दिया जब वो बच्चे को लेकर वार्ड में गयी तो पूरा वार्ड खाली था जबकि नीचे बेड नहीं है का तख्ती टगा हुआ था ।

पूरी रात मां बेटा का रो रो कर बुरा हाल था बाहर कुत्ता सब आपस में लड़ रहा था औऱ अंदर मच्छर उठा कर ले जाने को आमदा था। ये हाल है और इस हाल में आपको कोरोना के साथ जीने कि आदत डालने को कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए ना कि हम सब इतने गंभीर मसले पर भी चुप रहने कि पुरानी आदत है ।

फ्रांस में कोरोना को रोकने में असफल रहे पीएम को इस्तीफ़ा देना पड़ा है। यहां इस्तीफ़ा तो बड़ी बात है चार माह होने को है एक अदद टेस्ट कि व्यवस्था भी सही तरीके से सरकार नहीं कर पायी है फिर सरकार से कोई शिकायत नहीं है और इसी का लाभ उठा कर सरकार चुनाव कराने कि तैयारी में जुट गया है ।

(ये लेख संतोष सिंह के फेसबुक वॉल से लिया गया है।)

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