sudhir chaudhary
Sudhir Chaudhary

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अभी वोटों की गिनती जारी है, लेकिन अबतक के रुझानों से तस्वीर साफ़ हो गई है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का ताज एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल के सिर पर ही सजेगा।

इन नतीजों के बाद जहां लोग दिल्ली की जनता के फैसले को सूझबूझ वाला बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस फैसले के लिए जनता को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। दिल्ली की जनता को कोसने वालों में एक नाम ज़ी न्यूज़ के एंकर सुधीर चौधरी का भी है। जिन्होंने एक बार फिर से दिल्ली की जनता को मुफ्तखोर बता दिया है।

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सुधीर चौधरी ने शुरुआती रुझानों के बाद ही ट्विटर पर एक पोस्ट लिखा। जिसमें उन्होंने दिल्ली के जनादेश पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “क्या ये भारतीय राजनीति का ‘मुफ़्त काल’ है?”

दरअसल, सुधीर चौधरी का मानना है कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता का आर्शीवाद दोबारा उनकी मुफ्त योजनाओं की वजह से मिला है। ग़ौरतलब है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने ग़रीबों को मुफ्त बिजली दे रखी है, साथ ही महिलाओं को डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दे रखी है।

सुधीर चौधरी का मानना है कि दिल्ली की जनता को केजरीवाल सरकार के काम को देखकर नहीं बल्कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वोट करना चाहिए। इससे पहले दिल्ली चुनाव का एग्ज़िट पोल सामने आने के बाद भी सुधीर चौधरी ने दिल्ली की जनता को जमकर कोसा था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली की जनता को सिर्फ मुफ्त की चीजों से मतलब है, देश और राष्ट्रवाद से नहीं।

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एग्ज़िट पोल सामने आने के बाद उन्होंने अपने शो में कहा था, “धारा-370, राम मंदिर, कश्मीर इस तरह की बातें कोई मायने नहीं रखती। इस तरह के मुद्दे कोई मायने नहीं रखते। दिल्ली की जनता को न तो बालाकोट स्ट्राइक से कोई लेना-देना है, न राम मंदिर से कोई मतलब है और न कश्मीर की धारा 370 से कोई लेना-देना है। न उसे देश के टूट जाने से कोई लेना-देना है।”

इतना ही नहीं बीजेपी की हार से बौखलाए सुधीर ने दिल्ली की जनता को ग़ैर-ज़िम्मेदार और आलसी तक बता डाला था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली वाले सिर्फ अपने में मस्त रहना चाहते हैं। वो ये चाहते हैं देश टूटे-फूटे या ना टूटे, कुछ भी होता रहे, मेरा जीवन आराम से चलता रहे। दिल्ली की जनता अपने जीवन के संघर्ष में बिजी है। उसे देश से कोई मतलब नहीं। दिल्ली की जनता सिर्फ फोन पर चिपकी रहती है और वो सिर्फ सोशल मीडिया पर एक्सपर्ट हैं”।

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