उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहने वाले मोहम्मद सादिक़ देश का नाम रौशन करना चाहते हैं। वह देश को पदक दिलाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। वह एक दिन के अंतराल में 50 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। लेकिन उनके इस जब्ज़े की राह में उनकी ग़रीबी रोड़ा बन रही है।

तमाम प्रतिभाओं के बावजूद किसी भी खेल में उतरने के लिए अभ्यास और बेहतर प्रशिक्षण की ज़रूरत होती है। लेकिन प्रतिभाओं से भरपूर मोहम्मद सादिक़ के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह देश को पदक दिलाने के सपने को पूरा करने के लिए अच्छा प्रशिक्षण ले सकें। प्रशिक्षण तो दूर की बात है, सादिक़ के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वह दौड़ने के लिए कायदे की डाइट और जूते ले सकें।

पत्रकार दिलनवाज़ पाशा ने सोशल मीडिया के ज़रिए सादिक़ की आर्थिक मदद करने की अपील की है। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर सादिक़ का फोन नंबर भी शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि वह सादिक़ के लिए रनिंग शूज़ और ट्रैक सूट भेज रहे हैं और जो लोग सादिक़ की मदद करना चाहते हैं, वह सादिक़ के नंबर पर संपर्क कर उनकी मदद कर सकते हैं।

कैसे शुरु हुआ सादिक के दौड़ने का सफ़र?

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर ज़िला प्रशासन स्कूली छात्रों की दौड़ की तैयारी कर रहा था। ऐलान हो रहा था कि जीतने वाले को ईनाम दिया जाएगा। इस ऐलान को सादिक़ ने सुन लिया और ईनाम की आस में दौड़ लगा दी। इस रेस में उसके प्रदर्शन ने सबको हैरान कर दिया।

हालांकि ये रेस में फेयर नहीं थी। जिसके चलते उसे रेस में दूसरा स्थान मिला। लेकिन सादिक़ की क़िस्मत अच्छी थी कि उसकी प्रतिभा अमरोहा के ज़िलाधिकारी की नज़र में आ गई। ज़िलाधिकारी ने उसकी दौड़ में दिलचस्पी दिखाई।

ज़िलाधिकारी ने उसे मिलने के लिए बुलाया। शाबाशी दी। पर्ची पर लिखकर ज़िला खेल अधिकारी का नंबर दिया और प्रशासनिक सहायता का भरोसा भी दिया। यूपी के खेलमंत्री चेतन चौहान ने भी उसे मिलने के लिए बुलाया है।

सादिक़ दौड़ना चाहता है। पदक लाना चाहता है। लेकिन उसे आगे का रास्ता साफ़ दिखाई नहीं दे रहा। उसके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। जिसके चलते वह बेहतर प्रशिक्षण और डाइट नहीं  ले सकता। उसे दौड़ने के लिए जो खुराक चाहिए वो उसे नहीं मिल पा रही। उसे दौड़ने के अभ्यास के लिए जो जूते चाहिए वो उसे आर्थिक तंगी के कारण नहीं खरीद पा रहा। ऐसे हालात में सादिक़ को मदद की ज़रूरत है, जिससे वह बिना किसी दिक्कत के दौड़ सके और भारत के लिए पदक जीत सके।