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गुजरात दंगों में शामिल भाजपा की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को पिछले साल बरी कर दिया गया था। कोडनानी को निर्दोष बताने के लिए खुद BJP अध्यक्ष अमित शाह कोर्ट पहुंचे हुए थे। जहां उन्होंने कहा 28 फरवरी, 2002 को नरोदा गाम दंगों के दौरान माया कोडनानी गुजरात विधानसभा में मौजूद थीं।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि घटना वाले दिन सुबह वो खुद सोला सिविल अस्पताल में कोडनानी से मिले थे। इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने माया कोडनानी को बरी कर दिया है।

गुजरात हाईकोर्ट ने एसआईटी (SIT) की विशेष अदालत के फैसले को पलटते हुए 32 दोषियों में से 17 को बरी कर दिया, जिसमें माया कोडनानी का नाम भी शामिल था।

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साथ ही शाह ने कोर्ट को ये भी बताया था कि पुलिस उन्हें और माया कोडनानी को सुरक्षित स्थान पर ले गई थी, क्योंकि गुस्साई भीड़ ने उन्हें अस्पताल में घेर लिया था। वहीं शाह ने ये भी कहा था कि सिविल अस्पताल से पुलिस द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद माया कोडनानी कहां गईं उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।

नरोदा पाटिया नरसंहार- जिसमें मारें गए 97 लोग 

साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के नरोदा पाटिया नरसंहार में दिनदहाड़े 97 लोगों को मार दिया गया था। इसी मामले में कोडनानी पर दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप था। हालांकि साल 2012 में निचली अदालत ने उनको सजा सुनाई तो उन्‍होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उनको राजनीतिक षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है।

उन्‍होंने यह तक कहा था कि वह उस दिन नरोदा में मौजूद ही नहीं थीं। 2009 में जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने नरोदा पाटिया केस में पूछताछ के लिए बुलाया तो माया कोडनानी उपस्थित नहीं हुईं और उनको भगौड़ा घोषित कर दिया। उसके बाद बढ़ते दबाव के बीच उन्‍होंने सरेंडर किया और अपने मंत्री पद से इस्‍तीफा भी दे दिया था।

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अब जब बीजेपी मालेगाँव ब्लास्ट में मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा को टिकट दे रही है। सोशल मीडिया से लेकर विपक्षी नेताओं तक ने बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया गया है।

मगर BJP के लिए ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि जिस पार्टी का अध्यक्ष पहले से ही दंगा आरोपी के समर्थन में गवाही दे चुका हो वो पार्टी अगर साध्वी प्रज्ञा को टिकट दे रही है तो इसमें नया कुछ नहीं है।