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इस बार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसकी सरकार बनेगी? यह जानने के लिए एबीपी न्यूज़ ने सी-वोटर के साथ मिलकर इन राज्यों के लोगों के सियासी मूड का जाएज़ा लिया।

इस जाएज़े के बाद एबीपी ने दावा किया कि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की हवा है और वह बहुमत के साथ इन तीनों राज्यों में सरकार बना सकती है।

एबीपी न्यूज़ द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कांग्रेस को 230 में से 117 सीटें, राजस्‍थान में 200 में से 130 सीटें और छत्‍तीसगढ़ में 90 में से 54 सीटें मिलेंगी। वहीं बीजेपी मध्य प्रदेश में 106, छत्‍तीसगढ़ में 33 और राजस्‍थान में 57 सीटों पर ही सिमट जाएगी।

ग़ौरतलब है कि इन तीनों राज्यों में फिलहाल बीजेपी की सरकार है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने इन तीनों राज्यों में बड़ी जीत दर्ज की थी। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को तो बीजेपी के अभेद्य किले के रूप में देखा जाता है। यहां बीजेपी की करीब 15 सालों से सरकार है।

वहीं बात राजस्थान की करें तो यहां भी बीजेपी कमज़ोर नहीं, इससे पहले 2013 में बीजेपी ने 163 सीटों के साथ यहां विजय पताका लहराया था।

दिलचस्प बात तो यह है कि इन तीनों राज्यों को बीजेपी ने लोकसभा चुनावों से पहले जीता था, यानी उस वक्त बीजेपी की जीत में मोदी फैक्टर भी नहीं जुड़ा था। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो बीजेपी के साथ मोदी फैक्टर जुड़ने से पार्टी को काफी फायदे हुआ है।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पार्टी को लगातार कई राज्यों में बड़ी जीत मिली है। मोदी फैक्टर के चलते पार्टी ने उन राज्यों में भी जीत का परचम लहराया जहां उसका नामो-निशां भी नहीं था। बीजेपी ने पीएम मोदी के बल पर ही त्रिपुरा में लेफ़्ट के 25 साल पुराने किले को ढहा दिया। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी अपने स्वर्णकाल में है।

ऐसे में एबीपी का यह सर्वे जिसमें तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बढ़त दिखाई जा रही है, सवाल खड़े करता है। हाल ही में हुए कर्नाटक चुनाव में बीजेपी से पीछे रहने वाली कांग्रेस क्या वाकई इन तीन राज्यों में बीजेपी को पछाड़ सकती है?

मौजूदा स्थिति को देखते हुए एबीपी के इस सर्वे पर यकीन करना आसान नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि इस सर्वे को आख़िर किस मक़सद से पेश किया जा रहा है, जबकि साफ़ तौर पर चुनावों में कांग्रेस की कोई हवा नज़र नहीं आ रही। कहीं इस सर्वे का मक़सद कांग्रेस का ध्यान वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हटाने की मांग से भटकाना तो नहीं!

कांग्रेस लगातार बीजेपी की जीत में ईवीएम के योगदान की बात करती रही है। अभी पिछले महीने ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में होने वाले विधासभा चुनाव में इस्तेमाल होने वाले ईवीएम को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस का कहना था कि विधासभा चुनाव से पहले गुजरात से छत्तीसगढ़ पहुंची इवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है।

कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सूबे में आई ईवीएम की जांच अज्ञात लोगों द्वारा की गई, जिसे ज़िला निर्वाचन कार्यालयों ने रातों-रात ओके टेस्टेड का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। कांग्रेस ने ईवीएम हैक किए जाने का अंदेशा जताते हुए सूबे में ईवीएम के बग़ैर चुनाव कराने की मांग की थी।

गौरतलब है कि यूपी चुनावों में हार के बाद सपा और बसपा ने ईवीएम की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए थे। जिसका समर्थन करते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से ईवीएम के बग़ैर चुनाव कराने की मांग की थी। मुख्य विपक्षी पार्टी होने की वजह से कांग्रेस की मांग को गंभीरता से लिया भी जा सकता है। ऐसे में इस सर्वे का लॉलीपॉप थमाकर कहीं कांग्रेस की ईवीएम बैन की मांग को कमज़ोर तो नहीं किया जा रहा!

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