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रविवार शाम जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहें थे। ठीक उसी वक़्त झारखंड के खूंटी में तीन लोगों को भीड़ ने महज प्रतिबंधित मांस बेचने के आरोप में हमला बोल दिया जिसमें एक शख्स की मौत हो गई।

दरअसल बीजेपी शासित प्रदेश झारखंड में सबकुछ ठीक नहीं है। वो भी तब जब एक लिंचिंग का मामला (तबरेज अंसारी) ख़त्म भी ना हुआ हो। भीड़ ने एक बार फिर गोकशी के नाम पर एक की जान ले ली है। इसके बाद भी विदेश में जाकर प्रधानमंत्री मोदी ये दावा करते हुए नज़र आ रहें है कि देश में सबकुछ ठीक है।

इस मामले पर पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि ‘सुबह 10 बजे कर्रा पुलिस स्टेशन के प्रभारी को कुछ ग्रामीणों ने जानकारी दी कि कुछ लोग प्रतिबंधित मांस बेच रहे हैं और ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया है और उनकी पिटाई हो रही है।

पुलिस जब वहां पहुंची तो पाया कि तीन लोगों की गांववालों ने पिटाई कर दी है। दो लोगों को इलाज के लिए रांची के रिम्स भेजा गया। एक शख्स की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस के अनुसार इस मामले में पांच लोगों की गिरफ़्तारी तो हुई है मगर उनकी मदद से अब और लोगों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

ऐसे में सवाल उठता है कि लगातार उग्र होती भीड़ को आखिर रोकने का क्या इलाज हो सकता है? क्या सिर्फ ऐसी घटना पर निंदा करने के काम चल जाएगा। एक बार को मान भी लिया जाए कि वो प्रतिबंधित मांस ले जा रहा था।

ऐसे में क्या उसे पुलिस के हवाले नहीं किया जा सकता था? क्या किसी कानून तोड़ने वाले को सीधे फांसी का प्रावधान है? क्या भीड़ इस तरीके से ही अब लोगों से निपटेगी? ऐसे कई सवाल है जो झारखंड की इस लिंचिंग ने फिर जिंदा कर दिया है। मगर जवाब देने वाले सियासतदान सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहें है अगर ये ठीक है तो इससे अच्छा बेकार ही होगा।

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