जहां बीजेपी के कुछ नेता चुनाव जीतने के लिए सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं आसनसोल दंगों में अपने बेटे को खो चुके नूरानी मस्जिद के इमाम इमादुल्लाह रशीदी चुनावों के बीच आपसी सद्भाव को बनाए रखने की अपील करते नज़र आ रहे हैं।

इमाम इमादुल्लाह रशीदी ने जुमे की नमाज़ के ख़ुतबे में कहा, “आप सभी किसी को भी वोट देने के लिए आज़ाद हैं। लेकिन इस दौरान हम सभी को एकजुट रहना चाहिए और क्षेत्र में अम्न का माहौल बना रहे इसके लिए कोशिश करनी चाहिए। चुनाव आते-जाते रहेंगे मगर हमें एकजुट रहना होगा। चुनाव के बीच किसी भी तरह की बहसबाजी या ऐसा माहौल न बने जिससे कि हमारे बीच में खटास पैदा हो”।

उन्होंने आगे कहा, “इस देश में हजारों सालों से हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों का साथ रहने का इतिहास रहा है। हमें कोई भी ऐसा मौका नहीं देना है जिससे कि जाति और धर्म के नाम पर कोई हमें बांटे और हमारी सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचाएं।’ इमाम ने सभी राजनीतिक दलों के समर्थको से भी अपील की कि वे एक दूसरे की विचारधाराओं का सम्मान करते हुए शांति बनाए रखें”।

वहीं चुनावों के बीच बीजेपी नेताओं के रवैये की बात करें तो वह सांप्रदायिकता को हवा देते नज़र आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री एवं बेगूसराय से बीजेपी के उम्मीदवार गिराराज सिंह लगातार मुसलमानों को धमकी दे रहे हैं तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अली-बजरंगबली करते दिखाई दे रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि चुनावों के बीच शांति की अपील करने वाले इमाम रशीदी ने पिछले साल मार्च में रामनवमी के बाद भड़की हिंसा में अपने 16 साल के बेटे हफ़ीज सबीतुल्ला खो दिया था। बेटे की मौत के बाद कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। मगर ऐसे वक्त में भी उन्होंने समझदारी दिखाते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। उनकी इस अपील के बाद देशभर में उनकी जमकर प्रशंसा हुई थी।