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आर्थिक रेटिंग देने वाली एजेंसी फिच ने भारत के राजकोषीय घाटे को लेकर बुधवार को नए आंकडें जारी किए। फिच ने अपने अनुमान में बताया कि भारत का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा। फिच इंडिया रेटिंग ने कहा कि, चालू वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.6 फीसदी पर रह सकता है।

पहले राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया था। इसका साफ़ मतलब है कि फिंच ने राजकोषीय घाटे का अनुमान 0.2 फीसदी बढ़ा दिया है। अगर फिच का अनुमान सच साबित होता है तो सरकारी खजाने पर जबरदस्त बोझ बढ़ेगा।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने बीते 5 जुलाई को अपने आम बजट में राजकोषीय घाटे को 3.3 फीसदी पर नियंत्रित रखने का अनुमान लगाया था।

फिच के मुताबिक, सुस्त आर्थिक वृद्धि के अलावा जीएसटी कलेक्शन और कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से राजस्व संग्रह को नुकसान होने की संभावना है। यही वजह है कि राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ाया गया है।

फिच ने कहा, हमारा मानना है कि राजकोषीय खर्च में कटौती नहीं करने की मंशा के बीच सुस्त आर्थिक वृद्धि और सरकार के कॉरपोरेट टैक्स की दर में कटौती से राजस्व संग्रह हम रहेगा। इस वजह से हमने राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ाया है।

बता दें कि सरकार ने 20 सितंबर को घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर कको 30 फीसदी घटाकर 22 फीसदी कर दिया है। इस कदम से 2019-20 के दौरान सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान रहने का अनुमान है। जबकि जीएसटी कलेक्शन में भी कमी आई है और यह सरकार के लक्ष्य से नीचे चल रहा है।

इसके साथ ही फिच ने कहा कि, हम राजस्व वृद्धि के अपने अन्नुमन को भी संशोधित करके 13।1 फीसदी से 8.3 फीसदी कर रहे हैं। यह सरकार के 13.2 फीसदी वृद्धि के बजट अनुमान से काफी कम है।

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